रविवार, 8 मार्च 2009

होली में तुम्हारा स्मरण

पिचकारियों के मौसम में
और स्मृतियों के धुंधलेपन में
मन में कुछ घुलता सा
सफेदी के डेले की तरह
विस्फोट करता
मन में कोई ढूंढता सा
नामजद किंतु गुमशुदा दोस्तों को

लाल खून से लिखे शिलालेखों पर
कुछ उकेरता सा
दिन की तरह
बेचैनी लेकर
और फिर कुछ डूबता सा
झुंझलाकर उदास
दिन ही की तरह

सागर की गहराइयों में
या अंतरिक्ष की जमीन पर
गुम हो जाने वालो
होली में तुम्हारा स्मरण
पानी में घुलकर उतर रहा है टेसुओं से

1 टिप्पणी:

Santhosh ने कहा…

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Jai..Ho...

मेरे बारे में

mathura, uttar pradesh, India
पेशे से पत्रकार और केपी ज्योतिष में अध्ययन। मोबाइल नंबर है- 09412777909 09548612647 pawannishant@yahoo.com www.live2050.com www.familypandit.com http://yameradarrlautega.blogspot.com
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