रविवार, 12 दिसंबर 2010

और लुटा देनी है

मुझे तुम्हारे सबसे भीतर बैठे इंसान से मिलना है
उससे भी भीतर सपने बुन रही लड़की से
मांगना है खुला आसमान
गुलाबी होठों पर जो सबसे ज्यादा अच्छी लगेगी
ऐसी चमक जिंदगी की फैलानी है मुझे
तुम में ढूंढनी है मुझे अनगिनत बेशुमार खुशी
और लुटा देनी है
तुम्हारे ही अकेलेपन में

2 टिप्‍पणियां:

shikha kaushik ने कहा…

bahut achchhi bhavbhari kavita .badhai .mere blog ''vikhyat'' par bhi aapka hardik swagat hai .best of luck.

अवनीश सिंह ने कहा…

कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया
सुन्दर प्रस्तुति

मेरे बारे में

mathura, uttar pradesh, India
पेशे से पत्रकार और केपी ज्योतिष में अध्ययन। मोबाइल नंबर है- 09412777909 09548612647 pawannishant@yahoo.com www.live2050.com www.familypandit.com http://yameradarrlautega.blogspot.com
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