शनिवार, 30 अगस्त 2008

ठंडे संबंधों में ऊष्मा चाहिए

आओ सूर्य आओ
उसके ठंडे संबंधों को ऊष्मा दो
यह तो सब कपट कारिंदे हैं
घने कोहरे
गरजते बादल
इन्होंने ही पैदा किया है
ठंडापन गरजकर-बरसकर
यह तो सब व्यापारी हैं
इन्होंने ही बढ़ाया है अवमूल्यन
मौसम में सावन भादों में
अंबर के नील पर चमकते सूर्य
तुम कितना भागे हो
या कि डटे रहते हो
तुम कितने अपराजित हो
या कि पराजित हुए हो
-जितना वह

आओ अंबर के प्रहरी
खलाओं को चकरघिन्नी खिलाते सूर्य
उफक पर मंडराते काले बादलों के पिंड को
सुखा दो अभी सुखा दो
उसके ठंडे संबंधों में ऊष्मा भर दो
और उफक पर उसे बस जाने दो

कोई टिप्पणी नहीं:

Powered By Blogger

मेरे बारे में

mathura, uttar pradesh, India
पेशे से पत्रकार और केपी ज्योतिष में अध्ययन। मोबाइल नंबर है- 09412777909 09548612647 pawannishant@yahoo.com www.live2050.com www.familypandit.com http://yameradarrlautega.blogspot.com
free website hit counter
Provided by the web designers directory.
IndiBlogger - Where Indian Blogs Meet www.blogvani.com blogarama - the blog directory Submit चिट्ठाजगत Hindi Blogs. Com - हिन्दी चिट्ठों की जीवनधारा

मेरी ब्लॉग सूची