रविवार, 31 अगस्त 2008

पहाड़ पर वह बहुत याद आती है

उसका मकसद क्या है
उसकी इच्छाएं इतनी उड़ान क्यों भरती हैं
और उसके सपने किस घर जाते हैं

उसे हर चीज के प्रतिबिम्ब दिखाए गए
उसे उसके जीवन जीने के ढंग के
बारे में लिया गया एक साक्षात्कार
और समुद्र के पार एक बस्ती दिखायी गयी
यहां वह अपना घर बसा सकती थी

समुद्र ज्वार-भाटों से ऊपर उठ गया था
लहरें मुहं चुराकर छिप गयीं थीं
उसके सीने में
मछलियों ने बनाया था एक पुल
और उसकी वनस्पतियों ने
उपज कर दिखाया था किसी के
जिस्म पर पहली बार

सुखद जीवन का गणित हल करने को
खंगाला गया था बीज गणित
त्रिकोणमितीय के जरिए किया गया
आने वाली आपदाओं का दिशा बोध
और विवेक बना रहे बुरे समय में
इसके लिए एक प्राथर्ना पत्र
पहले ही ठोंक दिया गया था ईश्वर की मेज पर

उसे अपनी गरीबी में भी दी गयीं भेंट
साक्ष्य के लिए पुस्तकालयों में जाकर
पढ़ाए गए शास्त्र वेद पुराण

रचना कर्म के लिए कई बार
बुक कराए गए प्रायः मंहगे होटल
उसने कहा था-पहाड़ पर दौड़ने के बाद
शरीर का शिथिल होना आवश्यक है

यकायक क्यों निष्ठुर हुए उसके निर्णय
उसके सपनों को किस बस्ती में घर मिल गया
और उसके मकसद
बहुत दूर जाकर ही
क्यों हुए झंकृत

पहाड़ पर वह बहुत याद आती है
और पहाड़ से नीचे तो भुलायी ही नहीं जाती

1 टिप्पणी:

ई-हिन्दी साहित्य सभा ने कहा…

पवन जी,
समुद्र ज्वार-भाटों से ऊपर उठ गया था
लहरें मुहं चुराकर छिप गयीं थीं
उसके सीने में
मछलियों ने बनाया था एक पुल
और उसकी वनस्पतियों ने
उपज कर दिखाया था किसी के
जिस्म पर पहली बार
आप कवि हैं जनाब, क्या कह दिया आपने अपने इन चार पंक्तियों मे, गजब का लिखा है आपने।
जारी रखें। - शम्भु चौधरी

मेरे बारे में

mathura, uttar pradesh, India
पेशे से पत्रकार और केपी ज्योतिष में अध्ययन। मोबाइल नंबर है- 09412777909 09548612647 pawannishant@yahoo.com www.live2050.com www.familypandit.com http://yameradarrlautega.blogspot.com
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