रविवार, 31 अगस्त 2008

एक दिन लौट आएंगी प्रेमिकाएं

ह्रदय बींध कर चली गयी प्रेमिकाओं के
चित्रों की प्रदर्शनी लगी है
चित्र में प्रेमिका हंस रही है
ठिठोली कर रही है
कविता लिख रहे प्रेमी का
उड़ा रही है मजाक

पहाड़ से कूद मरने का डर
दिखा रही है उसके वियोग में
चालाक भाई से नजर बचा
पढ़ना चाह रही है उसके लिए
लिखा गया प्रेम पत्र
कामायनी की जगह लिखने पड़ रहे हैं पत्र
गणित के सूत्र रटने के स्थान पर
हिसाब लगा रही है उसके साथ बिताए दिनों का
इम्तिहान में मिलने जा रही है चोरी छिपे पार्क में
और योजना बना रही है
कहीं निकल जाने का उसके साथ
इम्तिहान बाद एक और इम्तिहान के लिए

चित्र से धीरे-धीरे बाहर आ रही प्रेमिका
उसे ले रही है आगोश में
सुला रही है सीने पर
लगता है पूरी तरह उतार देगी थकान
उसके पैरों में घुंघरू झुनझुनाएंगे
तबला बजेगा और किसी बादशाह की नजर से
देखेगा वह उसका दैवीय नृत्य

दूर जा चुकी प्रेमिकाएं
वापस आ रही हैं अपने वतन
एक प्रेमी उसे देखते ही
सीने से सटा लेगा
दूसरा उसके साथ जीभर नाचेगा
तीसरा फिर से उठाएगा कलम
चौथा पहाड़ पर जाएगा उसके साथ
पांचवा चला जाएगा दिल्ली उसे लेकर
कोई घर पर ही रखेगा मां-बाप के साथ
और कोई हो जाएगा इतना मस्त कि
आने वालों का करने लगेगा मार्गदर्शन
एक जो मरने जा रहा था
लौटते हुए गुनगुनाएगा प्रेम के गीत
एक अपनी जेब के सारे पैसे
भिखारिन को देना चाहेगा
ताकि वह लौट सके अपने भिखारी के पास
और अगला अपना सबकुछ लुटाकर
ऐसे होगा खुश कि पहले कभी हुआ न हो

चित्रों में हरकत होने लगी है
अपना स्थान बना रहे हैं चित्र
प्रदर्शनी अभी लगी ही रहेगी

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मेरे बारे में

mathura, uttar pradesh, India
पेशे से पत्रकार और केपी ज्योतिष में अध्ययन। मोबाइल नंबर है- 09412777909 09548612647 pawannishant@yahoo.com www.live2050.com www.familypandit.com http://yameradarrlautega.blogspot.com
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